श्री"दाऊजी महाराज" का 114 वां मेला "प्रादेशिक" "प्रशासनिक" "उत्तर प्रदेश" "शासन" के अंतर्गत हो गया है।श्री "दाऊजी महाराज" "मंदिर" "किला" स्थित "श्री "वेद भगवान" "शिविर" में "राधा अष्टमी" "महोत्सव" तथा "रामनवमी की "महिमा" पर पं "बागीष कुमार शर्मा" के संयोजन में राधा रानी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा "राधा नाम आधार" हे अर्थात "राधा" के बगैर "कृष्ण का नाम अधूरा" है। "राधा" तू "बड़भागिनी""कौन तपस्या कीन"।" तीन लौक" "तारण तरण" "सो तेरे अधीन"।। "राधा" "राधा" "रटत" ही सब "व्याधा" मिट जात। "राधा रानी" की "महिमा" अपार है। "भारतीय" "सभ्यता" के अनुसार "नारी" को सदा "आदर" और "सम्मान: दिया है। इसलिए "राधा कृष्ण" कहा जाता है ना कि "कृष्ण राधा" इसी प्रकार सदा "सीताराम" कहा जाता है ना कि "राम सीता" इसी माह में "नवरात्रि के अंतिम नवरात्रि में "रामनवमी" का उत्सव बड़े "उत्साह" के साथ मनाया जाना है। "राम" की "महिमा" "अपार' है। उन्हें "मर्यादा" "पुरुषोत्तम" "राम" कहा जाता है, जबकि "कृष्ण" "भगवान" को "गीता" का "उपदेश" देने वाला "महान" "राजनीतिज्ञ" अगर कहा जाए तो कोई "अतिशियोक्ती" नही होगी।
सभी "विद्वानों" ने अपने "संबोधन" मे "विचार" व्यक्त किये , "पं डॉ गणेश चंद वशिष्ठ" जी, "पं "जयशंकर" "पाराशर", "पं ऋषि, "कुमार कौशिक" व्दारा "राधाअष्टमी" की महिमा तथा "रामनवमी" के महत्व पर विचार व्यक्त किये।
उपस्थित भक्तजनों में "पं सुरेश कुमार शर्मा" "पं विकास दीक्षित" "विप्लव शर्मा" "पवन कुमार चौधरी" "महेश चंद" :धीरेंद्र सिंह चौहान" "अरुण शर्मा" "दीपेश तिवारी" "संजय कुमार टालीवाल" जी "मनोज कुमार" अग्रवाल "विनोद कुमार अग्रवाल" "पं उमेश चंद्र शर्मा" "पं सत्येंद्र स्वरुप शर्मा" "पं देव स्वरूप शर्मा" आदि उपस्थित "संयोजकत्व" मैं "पं अलंकार शर्मा" की "विशेष"भूमिका रही। श्री वेद भगवान शिविर में "जिला पंचायत अध्यक्ष"श्रीमती सीमा उपाध्याय :ब्लॉक प्रमुख"श्री रामेश्वर उपाध्याय के साथ "नगर पालिका अध्यक्ष" श्वेता चौधरी के साथ रंगीला जी आदि ने भी पूजन अर्चन किया।
व्यवस्थापक "बृजेश वशिष्ठ" "सत्येंद्र स्वरुप शर्मा" "फौजी" द्वारा उपस्थित विद्वान जनौ तथा भक्तजनों को "अंगवस्त्र" "पीत पटिका" पहना कर "यथायोग्य" सम्मान किया।श्री गणेश जी तथा "वेद भगवान" को भोग प्रसाद लगाकर सभी "भक्तजनों" को प्रसाद वितरण किया।
श्री "वेद भगवान" के "जयकारों" "धर्म की जय हो" "अधर्म का नाश हो" "प्राणियों: में सद्भावना हो" "विश्व: का कल्याण हो" "दाऊजी महाराज"की जय" "रेवती मैया की जय" "गौ माता की जय" "भारत माता की जय" "पार्वती पतियै" "हर हर" "महादेव" "श्री वेद भगवान" के "जयकारों" के साथ महोत्सव संपन्न हुआ।